जीवन की जगावे ज्योति, प्यास, शोथ, श्वास टाले।
अन्तिम बेचैनी से प्राण को बचाता है।।
बार-बार करवट की चाह होती रोगी को।
करवट बदले में विवशता दिखाता है।।
चित्त सो न सकता क्योंकि श्वास कष्ट बढने लगे।
आधी रात आयी मृत्यु योग ही जनाता है।।
रोग होवे कोई अन्त जीवन की ज्योति जागे।
केवल ’’आर्स’’ ही तो अन्त काल काम आता है।।
अन्तिम बेचैनी से प्राण को बचाता है।।
बार-बार करवट की चाह होती रोगी को।
करवट बदले में विवशता दिखाता है।।
चित्त सो न सकता क्योंकि श्वास कष्ट बढने लगे।
आधी रात आयी मृत्यु योग ही जनाता है।।
रोग होवे कोई अन्त जीवन की ज्योति जागे।
केवल ’’आर्स’’ ही तो अन्त काल काम आता है।।
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