Sunday, June 28, 2015

बेलाडोना – होमियो गीतावली – होमियोपैथिक

बेलाडोना – होमियो गीतावली – होमियोपैथिक 

अकड़न तथा भटकन रहे स्‍पंदन कहीं होता रहे।
या अचानक दर्द होकर फिर चला जाता रहे।।
तन ढांकन पर ही अगर आराम होता हो कहीं।
ढँक जाय कोई अंग तो होता पसीना हो वहीं।।
ज्‍वर भोग से या धूप से उत्‍प्‍त रोगी हो जहॉं।
दर्द, सूजन, लालिमा, प्रत्‍यक्ष दिखलाये वहॉं।।
ताप अरू उद्विग्‍न्‍ता के साथ यदि उन्‍माद हो।
”बेलाडोना” को दिये तत्‍काल ही आन्‍नद हो।।

एकोनाइट - होमियो गीतावली

एकोनाइट - होमियो गीतावली

स्वस्थ हो कोई न पहिले क्लेश का लवमात्र हो।
शीघ्र ही भयभीत होकर अगर पीडित गात्र हो।।

रक्त संचय हो अचानक बढ गया दुख द्वन्द्व हो।
किसी विधि से तनिक भी मिलता नहीं आनन्द हो।।

शीत या ठंडी हवा लग रोग पैदा कर दिया।
रक्त संचालन क्रिया में विध्न पैदा कर दिया।।

दर्द, बेचैनी बढें, ज्वर, प्यास, ज्वाला देखिए।
मृत्युभय अनुमान हो तब ‘‘एकोनाइट‘‘ दीजिए।।