Friday, April 14, 2017

रसटक्स homeopathy ruscus


स्नायुमंडल या कहीं की संधि यदि आकान्त हो।
करवट बदल रोगी दिखाता हो अगर कुछ शान्त हो।।
टाइफाइड की दशा में आंत जब आक्रान्त हो।
अंग बाॅंया ही अगर दुःख दर्द से अति क्रान्त हो।।
नम हवा के वेग से जब चित्त में अति भ्रांति हो।
मांसपेशी और श्लेष्मिक झिल्लियों में क्रान्ति हो।।
बेचैन अति उत्ताप हो या दर्द का आधिक्य हो।
‘रसटक्स‘ के व्यवहार से श्रम कष्ट तब भी शान्त हो।।

आर्स एल्ब ARSENICUM ALBUM - HOMOEOPATHIC

जीवन की जगावे ज्योति, प्यास, शोथ, श्वास टाले।
अन्तिम बेचैनी से प्राण को बचाता है।।
बार-बार करवट की चाह होती रोगी को।
करवट बदले में विवशता दिखाता है।।
चित्त सो न सकता क्योंकि श्वास कष्ट बढने लगे।
आधी रात आयी मृत्यु योग ही जनाता है।।
रोग होवे कोई अन्त जीवन की ज्योति जागे।
केवल ’’आर्स’’ ही तो अन्त काल काम आता है।।