एकोनाइट - होमियो गीतावली
स्वस्थ हो कोई न पहिले क्लेश का लवमात्र हो।
शीघ्र ही भयभीत होकर अगर पीडित गात्र हो।।
रक्त संचय हो अचानक बढ गया दुख द्वन्द्व हो।
किसी विधि से तनिक भी मिलता नहीं आनन्द हो।।
शीत या ठंडी हवा लग रोग पैदा कर दिया।
रक्त संचालन क्रिया में विध्न पैदा कर दिया।।
दर्द, बेचैनी बढें, ज्वर, प्यास, ज्वाला देखिए।
मृत्युभय अनुमान हो तब ‘‘एकोनाइट‘‘ दीजिए।।
No comments:
Post a Comment